मंज़िलें न भूलेंगे राह-रौ भटकने से
मंज़िलें न भूलेंगे राह-रौ भटकने से शौक़ को तअल्लुक़ ही कब है पाँव थकने से ज़िंदगी के रिश्ते भी दूर दूर तक निकले रूह जाग उठती है फूल के महकने से कितने तीर खाए है...
A stage for poets, storytellers, writers and creators to share their voice, their craft and their stories.
Rachnakaron ki Mehfil is here with intent to make the creations and creators to reach the widespread audience as much as it can. It has organized events in different cities to let the voices of creators be known to people all around the world.
याद रखिए यूँ नहीं ढलते हैं कविता में विचार, होता है परिपाक धीमी आँच पर एहसास की।
अदम गोंडवी
A glimpse of the people, words and moments that bring Rachnakaron ki Mehfil to life.
मंज़िलें न भूलेंगे राह-रौ भटकने से शौक़ को तअल्लुक़ ही कब है पाँव थकने से ज़िंदगी के रिश्ते भी दूर दूर तक निकले रूह जाग उठती है फूल के महकने से कितने तीर खाए है...
हार न अपनी मानूँगा मैं! चाहे पथ में शूल बिछाओ चाहे ज्वालामुखी बसाओ, किंतु मुझे जब जाना ही है— तलवारों की धारों पर भी, हँस कर पैर बढ़ा लूँगा मैं! मन में मरु-सी प...
(१) तुम धूल हो— पैरों से रौंदी हुई धूल। बेचैन हवा के साथ उठो, आँधी बन उनकी आँखों में पड़ो जिनके पैरों के नीचे हो। ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ तुम पहुँच न सको, ऐसा कोई...
बात सीधी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में ज़रा टेढ़ी फँस गई। उसे पाने की कोशिश में भाषा को उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो बने या फिर भाषा से बाहर आ...
हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो एक नौजवान की तरह, खेत में झूम रहे धान की तरह, मौत को मार रहे बान की तरह। हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो अजेय इंसान की तरह मरण के इस...
जागती हैं रात भर क्यों,ये भरी आँखें तुम्हारी!क्या कहीं दिन मेंतड़पता स्वप्न देखासुई जैसी चुभ गई क्याहस्त-रेखाबात क्या थीक्यों डरी आँखें तुम्हारी।जागती हैं रात भ...
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